सिंहावलोकन
भारी ईधन तेल एक कम-ग्रेड वाला ईंधन है जो मुख्यत: औद्योगिक बॉयलरों और अन्य प्रत्यक्ष स्रोत हीटिंग उपकरणों में इस्तेमाल किया जाता है (चित्र 1 देखें)। इसका प्रयोग एक मुख्य ईंधन के रूप में समुद्री उपकरणों और बड़े डीजल ईंजनों में भी किया जाता है।
चित्र 1: ईंधन तेल इमल्शन उत्पादन

एचएफओ एक विशिष्ट मिश्रण अवशेष है जो डीजल अथवा गैस ऑयल के साथ कच्चे तेल के शोधन की प्रक्रिया से बचा रह जाता है। ये अवशेष जो परिवेशी तापमान में ठोस होते हैं कभी-कभी डॉमर, टार, अवशिष्ट ऑयल अथवा ''टॉवर बॉटम'' कहलाते हैं। डीजल अथवा गैस आयल (कटर) के साथ मिलाने पर एक तरल पदार्थ उत्पन्न करते हैं जो परिवेषी तापमान पर शीरा जैसे होते हैं। इसके उच्च क्वथांक बिन्दु और टार जैसे रूप को देखते हुए एचएफओ को जलाने के लिए पाइपों के जरिये अथवा किसी बॉयलर में डालने से पहले इसे विशेष रूप से गर्म करना जरूरी होता है। इसी प्रकार, एचएफओ को आम तौर पर गर्म अवस्था में जमा करके रखा जाता है।
एचएफओ शोधित तेल ईंधनों में से सबसे कम महंगा ईंधन है और इसे आम तौर पर उन स्थापनाओं द्वारा भी प्रयोग में लाया जा सकता है जिनमें प्री-हिटिंग क्षमता हो। एचएफओ दहन तापमान विशेष रूप से बहुत अधिक होते हैं और हानिकर उत्सर्जन विशेष रूप से NOx और पीएम पैदा करते हैं। इसके अतिरिक्त, एचएफओ सफाई से नहीं जलता, और कार्बन अवशेष की काफी मात्रा छोड़ देता है जिससे दहन कक्ष दूषित हो जाता है तथा भट्टी और बॉयलर की क्षमता कम हो जाती हैं। इस अवशेष का समय-समय पर हटाना बहुत महंगा और समय लगने वाली प्रक्रिया होती है।
एपीटी ईंधन तेल इमल्शन्स
एपीटी प्रौद्योगिकी एक स्थिर ईंधन तेल इमल्शन (एफओई) बनाने के लिए एचएफओ को पतला बनाती है जिसके निम्नलिखित प्रचालन लाभ हैं:-
- यह बड़े औद्योगिक बॉयलरों की दक्षता सुधारने का प्रस्ताव करती है।
- इसके साथ-साथ यह NOx और पीएम उत्सर्जन में कमी लाती है।
- बेहतर दहन और उन्नत कार्बन क्षमता पैदा करती है।
- एफओई की ''स्वच्छ'' दहन विशेषताओं के कारण रखरखाव लागत और समय में कमी आती है।
एपीटी के भारी ईंधन तेल एम्लशन्स एचएफओ के प्रत्यक्ष प्रतिस्थापन होते हैं जिन्हें कभी-कभार #6 ईंधन तेल, बंकर अथवा अवशेष तेल कहा जाता है। एपीटी के भारी ईंधन तेल की जल मात्रा उपकरण और उपभोक्ता की आवश्यकताओं के आधार पर 8% से 30% तक भिन्न-भिन्न होती हैं।
ईंधन तेल इमल्शन्स ऐसे उत्पाद हैं जो बॉयलर उपकरणों और बड़े, धीमी गति के आंतरिक दहन ईंजनों के लिए बनाए जाते हैं। एफओई का प्रयोग सेवाओं, औद्योगिक और वाणिज्यिक बॉयलरों और समुद्री ईंजनों में किया जा सकता है। जल की मात्रा 8% और 30% के बीच हो सकती है और योजक मात्रा 0.05% और 2.0% के बीच हो सकती है। एफओई ईंधन को विभिन्न बॉयलर प्रचालन स्थितियों को बढ़ाने के अनुसार बनाया जा सकता है। ईंधन को मुख्य रूप से जल की भिन्न-भिन्न मात्रा के जरिए तैयार किया जाता है। हालांकि एफओई में जल की मात्रा किसी भी सीमा तक हो सकती है, किंतु साधारणतया एफओई को 2 ईंधन प्रकारों में बांटा जा सकता है; अल्प जल मात्रा और उच्च जल मात्रा।
न्यूनाधिक जल मात्रा वाला एफओई
न्यूनाधिक जल मात्रा वाला एफओई, एचएफओ का एक इमल्शन है जिसमें जल की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है (8% से 12%)। यह एक आयल फेज इमल्शन है अर्थात् सूक्ष्म बिंदु एचएफओ के आधार में छोड़े जाते हैं। वाष्प में चमकने वाली जल की मात्रा के कारण एचएफओ आधार का दूसरी बार विभक्त होने से और ज्यादा बड़ा सतही क्षेत्र उत्पन्न होता है जो दहन प्रक्रिया में सुधार करता है।
अधिक जल मात्रा वाला एफओई
अधिक जल मात्रा वाला एफओई, एचएफओ का एक इमल्शन है जिसमें जल की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है (15 से 30%)। एफओई से भिन्न यह एक आयल-इन-वॉटर इमल्शन है। एफओई की तरह पानी में अपने तेल के तत्व के दूसरी बार विभक्त होने से दहन प्रक्रिया में सुधार होता है। तथापि, इसकी उच्च जल मात्रा उच्च दहन तापमान को बहुत कम कर देती है जिससे NOx में भारी कमी आ जाती है।
हालांकि एचएफओ की तुलना में जल की अधिक मात्रा वाला एफओई ज्यादा महंगा होता है (पानी का कोई बीटीयू मूल्य नहीं होता), यह एक ऐसा उत्पाद है जो एफओई द्वारा दिए गए लाभों के अतिरिक्त मुख्यत: बड़े बॉयलरों के लिए NOx उत्सर्जनों को बहुत कम कर देता है। इस प्रकार, मध्य अवधि में अमेरिका और यूरोप दोहरे फायर्ड पावर उत्पादन संपत्तियों अर्थात विद्युत सयंत्रों जिन्हें प्राकृतिक गैस अथवा तेल जलाने की अनुमति है, के ऑपरेटरों के लिए विशेष रूप से आकर्षक होंगे।
एफओई के लाभ
एफओई एक ऐसा उत्पाद है जो औद्योगिक और वाणिज्यिक बाजार खण्डों में बाजार की मौजूदा आवश्यकता को पूरा करता है और इसमें उत्सर्जन में कमी लाने वाले उत्पाद के रूप में विकसित होने की क्षमता होती है जो औद्योगिक और वाणिज्यिक बॉयलरों के लिए अनिवार्य होती है। एफओई का मुख्य लाभ द्वितीयक पर्यावरण लाभों के साथ प्रचालनात्मक सुधार करना और रखरखाव लागत को कम करना है।
प्रचालनात्मक लाभ
बॉयलरों में अधिकांश राख और धातु अवशेष जमने की समस्या कार्बन के पूरी तरह से न जलने के कारण होती हैं। यदि बिना जला कार्बन और राख मिल जाएं तो इससे एक तरल पदार्थ बनता है। जब ये पदार्थ बॉयलर टयूब जैसी ठंडी सतह पर पहुंचता है तो तरल पदार्थ सख्त हो जाता है और ट्यूब की सतह पर धातु अवशेष को जमा देता है। यह धातु अवशेष ताप अंतरण में बाधा पहुंचाता है जिससे क्षमताओं में कमी आती है। ''स्वच्छ'' दहन विशेषताओं के कारण एफओई इस अदक्षता में कमी लाता है और बॉयलर की संरचना के आधार पर उसमें कुछ सीमा तक सुधार करता है। परीक्षण से पता चला है कि संवहन ताप अंतरण पर आधारित बॉयलर रेडिएंट ताप संचरण पर आधारित बॉयलरों की बजाय एफओई के प्रयोग से अधिक लाभ देंगे।
पर्यावरण संबंधी लाभ
न्यूनाधिक जल मात्रा वाले एफओई के द्वितीयक लाभ पर्यावरण से संबंधित है। कार्बन के और अधिक पूरी तरह जलने से अपारदर्शिता (धुआं) और स्टैक से पैदा होने वाले विविक्त पदार्थ में कमी आती है। इसके अतिरिक्त, दूसरी बार विभाजन से बॉयलरों को आक्सीजन की कम पहुंच से प्रचालन में मदद मिलेगी, परिणामस्वरूप NOx उत्सर्जनों में कमी आती है। NOx तब पैदा होता है जब नाइट्रोजन (N2) ताप की मौजूदगी में आक्सीजन के साथ मिलता है। घटी हुई आक्सीजन आवश्यताएं प्रत्यक्ष रूप से न्यून NOx उत्सर्जनों में बदल जाती हैं।
स्टैक अपारदर्शिता (धुआं) और कणों का निकलना बॉयलर ऑपरेटरों के लिए एक व्यापक चिन्ता का विषय है। एफओई विविक्त उत्सर्जनों की मात्रा में कमी लाता है और दहन दक्षता को सुधार करके अपारदर्शिता को कम करता है। नीचे दिए गए चित्र 2 और चित्र 3 में प्रभाव प्लेट परीक्षण से विविक्त उत्सर्जनों के बारे में बताया गया है। यह नोट किया जाए कि एफओई के लिए विविक्त घनत्व कम होता है और विविक्त पदार्थ का आकार छोटा होता है, जिससे पता चलता है कि एफओई दूसरी बार विभक्त हो रहा है और अधिक कार्बन दहन कर रहा है।
चित्र 2: स्वच्छ भट्ठी और ऑक्सीजन की सामान्य पहुंच O2(60X) सहित नं. 6 आयल |
चित्र 3: स्वच्छ भट्ठी और ऑक्सीजन की कम हुई पहुंच O2(60X) सहित एफओई
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एफओई को मुख्यत: बॉयलर की दक्षता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है लेकिन यह बॉयलर की अपारदर्शिता, पीएम और NOx को भी घटाता है।
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