इमल्शन सिंहावलोकन
कंप्रेशन इग्निशन ईंजनों में ईंधन दहन, जो विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था का आधार है, NOx और विविक्त पदार्थ दोनों का उत्सर्जन करता है। सौभाग्य से यह एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जो दोनों को कम करती है। यह प्रौद्योगिकी ईंधन दक्षता को भी बढ़ा सकती है और इस प्रकार ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाती है। यह प्रौद्योगिकी, जो पर्यावरणिक और आर्थिक लाभ का ''ट्रिपल क्राउन'' प्रदान करती है, वह इमल्सीफाइड ईंधन प्रौद्योगिकी (ईएफटी) है।
एक इमल्शन दो न मिलने वाले तरल पदार्थों का मिश्रण होता है। उदाहरण के लिए, ऑयल फेज्ड इमल्शन में जल बिंदु होते हैं - वितरण चरण - यह पूरे ईंधन तेल में एक-समान वितरण करता है - सतत् चरण। कोई इमल्शन सतत् चरण की विशेषताएं ग्रहण कर लेता है। इसलिए आयल फेज्ड इमल्शन ईंधन तेल की विशेषताएं दर्शाते हैं न कि जल की।
इमल्शन की सहज प्रकृति अस्थिर होती है। समय के साथ वे वितरण और सतत् चरण सामग्रियों की स्थिर अवस्था में अलग हो जाते हैं। किसी इमल्शन का संघटन बनाए रखने के लिए सतही सक्रिय एजेंटो अथवा ''सरफैक्टेंट'' को ऑयल फेज्ड इमल्शन के उत्पादन में मिलाया जाता है। किसी ऑयल फेज्ड इमल्शन में ये ''सरफैक्टेंट'' एजेंट सतत् तेल चरण के माध्यम से वितरित जल बिंदुओं को ढक लेते हैं और जल बिन्दुओं को इकट्ठा होने अथवा सम्मिलित होने से बचाते हैं।
एपीटी की स्वामित्व वाली इमल्शन प्रौद्योगिकी
एपीटी की स्वामित्व वाली इमल्शन प्रोद्योगिकी इमल्सीफाइड ईंधनों का स्थिर मिश्रण बनाती है जिसमें जल का प्रतिशत भिन्न-भिन्न होता है। यह इमल्शन प्रौ़द्योगिकी उन पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के विन्यास द्वारा जल से विभिन्न बेस ईंधनों को जमाने के लिए लागू की जा सकती है जो दहन प्रक्रिया के दौरान पैदा हुए नाइट्रोजन आक्साइड (NOx) और विभिक्त पदार्थ (PM) दोनों के प्रदूषण को कम करते हैं।
एपीटी अपनी प्रौद्योगिकी इमल्सीफाइड ईंधन उत्पादन के महत्वपूर्ण घटकों और साथ ही इमल्सीफाइड ईंधनों के दहन की विशेष और अच्छी समझ के जरिए उपलब्ध कराती है।
इमल्सीफाइड ईंधनों के उत्पादन घटक
एपीटी ने अत्यधिक स्थिर और लागत प्रभावी ईंधन इमल्शनों के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकियां और प्रोटोकॉल विकसित किए हैं। इन इमल्शनों के उत्पादन में रासायनिक योजक पैकेज, यांत्रिक मिश्रण प्रक्रिया और तकनीकी जानकारी शामिल होती है। इन घटकों के सही संयोजन ओर अनुप्रयोग से ऐसे ईंधन इमल्शन तैयार होते हैं जो सख्त और स्थिर होते हैं और उस भारी ताप और दबाब को सह सकते हैं जिन्हें ईंधनों को किसी डीजल ईंजन, भट्ठी अथवा बॉयलर में दहन करने से पहले सहना पड़ता है। इमल्सीफाइड ईंधनों की विशिष्ट दहन विशेषताएं तभी दिखाई देती हैं जब तेल दहन स्तर पर एक इमल्शन बना रहता है। एपीटी की प्रौद्योगिकियां सतत् गुणवत्ता और मानक के स्थिर इमल्सीफाइड ईंधनों का विश्वस्त उत्पादन करती हैं।
एपीटी इमल्सीफाइड ईंधनों के उत्पादन के लिए अपेक्षित महत्वपूर्ण घटक हैं:
- एपीटी योजक;
- एपीटी मिश्रण इकाइयां; और
- एपीटी तकनीकी जानकारी
एपीटी योजक
एपीटी योजक प्रोपराइटरी तरल सूत्रों का एक परिवार होता है जो स्थिर इमल्शन बनाने के लिए जल और पेट्रोलियम उत्पादों को एक साथ रासायनिक तौर पर जमाते हैं। एपीटी योजकों में तैयार ईंधन का अंश लगभग 0.5% से 2% तक होता है। एपीटी ने डीजल इमल्शन, ईंधन तेल इमल्शन, इमल्सीफाइड बॉयोडीजल और अवशिष्ट तेल इमल्शन के लिए अलग-अलग योजक मिश्रण तैयार किए हैं।
एपीटी योजक उन अंतर्राष्ट्रीय प्रचालन वाले प्रसिद्ध रसायन आपूर्तिकर्ताओं द्वारा एपीटी के मानकों के अनुसार विनिर्मित किए जाते हैं जो एपीटी की कड़ी आवश्यकताओं के अनुसार हो सकें। एपीटी योजक सूत्र कुछ मामलों में पेटेंटों द्वारा संरक्षित की जाती है और अन्य मामलों में यह व्यापार रहस्यों के अधीन हैं।
एपीटी योजक ऐसे तरल पदार्थ हैं, जो अपेक्षाकृत सस्ते हैं, उनका आसानी से परिवहन, भंडारण और अनुप्रयोग किया जा सकता है। आमतौर पर उनकी मियाद बहुत लंबी होती है (कुछ मामलों में एक वर्ष तक)।
एपीटी मिश्रण इकाइयां
डीजल तेल इमल्शन, ईंधन तेल इमल्शन, इमल्सीफाइड बॉयो डीजल और अवशिष्ट तेल इमल्शन के उत्पादन के लिए अपेक्षित मिश्रण इकाई डिजाइन और अनुप्रयोग में अलग-अलग होते हैं। इन इकाइयों में एक विशेषता समान है कि वे अपेक्षाकृत सस्ती, विनिर्माण में साधारण तथा न्यूनतम सेवा एवं रखरखाव जरूरतों के साथ लागू की जाती हैं।
एपीटी मिश्रण इकाइयों का विनिर्माण अंतर्राष्ट्रीय प्रचालनों वाली ऐसी प्रसिद्ध इंजीनियरी कंपनियों द्वारा एपीटी मानकों के अनुसार किया जाता है जो एपीटी की कड़ी आवश्यकताओं का अनुपालन करते हैं। एपीटी मिश्रण इकाइयां कुछ मामलों में पेटेंटों और व्यापार रहस्यों द्वारा सुरक्षित रखी जाती हैं।
एपीटी मिश्रण इकाइयां आम तौर पर स्वचालित स्वत: पूर्ण इकाइयां होती हैं जिनमें अनेक मिक्सर, मोटरें, पम्प, मीटर और इंजैक्टर होते हैं जिनमें जल, आधार ईंधन और एपीटी योजक प्रोसेस किए जाते हैं।
इमल्सीफाइड ईंधन उत्पादों के उत्पादन में एपीटी मिश्रण इकाई में कंप्यूटर अनेक प्रचालन मापदण्डों को मापता है, उनकी निगरानी और नियंत्रण करता है जिसमें तापमाप, दबाब, प्रवाह दरें और मोटर परिवर्तक शामिल होते हैं। यदि कोई भी मापदण्ड मौजूदा प्रचालन सीमाओं से भिन्न होता है तो अलॉर्म प्रचालक को सूचित कर देता है। यदि एक निधारित अवधि के भीतर परिवर्तन नहीं किया जाता है तो इकाई स्वत: ही उत्पादन बन्द कर देती है। सतत् उत्पाद गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेटर की प्रचालन मापदण्डों तक सीमित पहुंच होती है। एपीटी के अधिकृत कार्मिक (पासवर्ड प्रमाणन द्वारा नियंत्रित) जरूरत पड़ने पर प्रचालन मापदण्डों में परिवर्तन कर सकता है। इसके अलावा, नियंत्रण प्रणाली विगत प्रचालनों का मूल्यांकन करने, किसी समस्या का निदान करने और यदि जरूरी हो तो एपीटी परिवर्तन करने के लिए रिमोट एक्सेस की अनुमति देती है।
एपीटी मिश्रण इकाइयों को उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जा सकता है; तथापि ''सामान्य'' एपीटी मिश्रण इकाइयां निम्नलिखित इमल्सीफाइड ईंधन उत्पादों का उत्पादन करती हैं:
- डीजल आयल इमल्शन - 14 बैरल (600 गेलन, 2,200 लीटर या 2 टन) प्रति घंटा
- ईंधस्न तेल इमल्शन - 428 बैरल (18,000 गेलन, 68,000 लीटर या 58 टन) प्रति घंटा; और
- अवशिष्ट तेल इमल्शन - 189 बैरल (7,900 गेलन, 30,000 लीटर या 26 टन) प्रति घंटा।
एपीटी तकनीकी जानकारी
एपीटी प्रौद्योगिकी इमल्सीफाइड ईंधन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक प्रौद्योगिकी थी और अभी तक बनी हुई है। पिछले दशक से एपीटी ने इमल्सीफाइड ईंधनों के गुणों, दहन विशेषताओं और हैण्डिलंग आवश्यकताओं के बारे में काफी खोज की है।
एपीटी प्रौद्योगिकी ने अपने उत्पादों के लिए अनेक प्रोटोकाल और गुणवत्ता नियंत्रण मानक शामिल किए हैं जो कच्चे सामग्रियों से लेकर उत्पाद, भंडारण, सुपुर्दगी और इस्तेमाल तक हैं। यह अधिकांश तकनीकी जानकारी डीजल ईंजनों, दहन टर्बाइनों, भट्ठियों और वाष्प बायलरों में उत्पादों की व्यापक जांच से हासिल की गई है। इनमें से अनेक परीक्षण उपभोक्ता स्थलों, स्वतंत्र प्रयोगशालाओं, आंतरिक और क्षेत्रीय स्तर पर वाणिज्यक परिवेश में किए गए थे।
इमल्शनों की दहन प्रक्रिया
एपीटी के इमल्सीफाइड ईंधन डीजल, नेफ्था, भारी तेल ईंधन अथवा बॉयोडीजल और जल जैसे पारंपरिक तरल ईंधनों का मिश्रण होते हैं। जल सूक्ष्मदर्शी आकार के बिंदुओं के रूप में मौजूद होता है जो आधार ईंधन के जरिए वितरित होता है। इस प्रकार का इमल्शन ऑयल फेज इमल्शन के रूप में जाना जाता है। परिणामस्वरूप, अंतिम रूप से तैयार इमल्शन में इसके आधार ईंधन की अनेक भौतिक विशेषताएं होती हैं (चित्र 1 देखें)
जल-आधारित ईंधनों के मामले में, जिसमें जल की मात्रा काफी अधिक होती है, जैसे कि आरओई, उल्टी प्रक्रिया सहित तथा आधार ईंधन को पानी में सूक्ष्म बिंदुओं द्वारा छोड़ा जाता है। परिणामस्वरूप, तैयार इमल्शन में जल के समान हैण्डलिंग विशेषताएं हो सकती हैं।
एपीटी इमल्सीफाइड ईंधनों को आधार ईंधनों तथा जल से एपीटी योजकों के रासायनिक संबंध के द्वारा बनाया जाता है और उसे एपीटी मिश्रण इकाई के जरिए सभी तीनों तरल पदार्थों से गुजारा जाता है।
चित्र 1: ऑयल-फेज इमल्शन दर्शाने वाला चित्र

दहन प्रक्रिया के बाद पानी क्यों कार्य करता है
हालांकि सभी इस वाक्यांश से परिचित हैं ''तेल और पानी को न मिलाएं'' लेकिन बहुत से लोग यह नहीं जानते कि किसी भी हाइड्रोकार्बन के जलने से पानी पर्याप्त मात्रा में वाष्प के रूप में उत्पन्न होगा जो ईंधन में हाइड्रोजन और वायु में ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया स्वरूप होता है। वास्तव में, ईंधन के प्रकार के आधार पर दहन प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न जल की मात्रा ईंधन के स्रोत की मात्रा से अधिक हो सकती है। दूसरे शब्दों में, एपीटी की इमल्सीफाइड ईंधन प्रौद्योगिकी केवल उस क्रम में ही परिवर्तन करती है जिसमें पानी को दहन प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जहां पानी कोई नया यौगिक नहीं होता।
मीथेन में इस दहन प्रतिक्रिया का पता चलता है। रासायनिक तौर पर, दहन प्रक्रिया में मीथेन तथा वायु में मौजूद ऑक्सीजन के बीच क्रिया होती है। इस रासायनिक क्रिया से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), जल (H2O) बनता है और बड़ी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है। निम्नलिखित क्रिया मीथेन की दहन प्रक्रिया को दर्शाती है, मिथेन की निम्नलिखित प्रतिक्रिया (सापेक्ष आणविक भार 16) से पूरा दहन होने पर जल के दो अणु उत्पन्न होते हैं जिनका कुल सापेक्ष भार 36 (जल का आणविक भार 18 होने के कारण) होता है।
CH4 + 2O2 > CO2 + 2H2O
यह उदाहरण साधारण व्याख्या प्रस्तुत करता है जिनमें कुछ अद्वितीय तत्व भी मौजूद होते हैं, जैसे वायु में नाइट्रोजन तथा ईंधन के अन्य घटक।
पानी दहन प्रक्रिया से पूर्व क्यों कार्य करता है
एपीटी की प्रोपराइटरी प्रौद्योगिकी इमल्सीफाइड ईंधनों का स्थायी मिश्रण बनाती है, जिसमें पानी के तत्वों का विविध प्रतिशत शामिल होता है। इमल्शन प्रौद्योगिकी का प्रयोग पानी के साथ विभिन्न मूल ईंधनों को जोड़ने के लिए किया जा सकता है जिससे अनेक पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का सृजन होता है जिससे दहन प्रक्रिया के दौरान NOx और PH प्रदूषण दोनों में कमी होती है।
इमल्शन प्रौद्योगिकी कोई नई नहीं है और यह कार्य करती है। यह पानी के वाष्पीकरण के जरिए ईंधन को बेहतर ढंग से विभाजित करता है जिससे दहन प्रक्रिया सहज और अधिक पूर्ण होती है (नीचे चित्र 2 देखें) डीजल या बॉयोडीजल आधारित इमल्शन में उप-माइक्रोन जल के कणों के हाई-शीयर ब्लेंडिंग प्रक्रिया के जरिए पेट्रोलियम में मौजूद रहता है जो स्थिर इमल्शन में पानी और पेट्रोलियम दोनों को एक साथ आणविक बांड में एक यौगिक के रूप में कार्य करता है। इमल्शन एकमात्र ऐसी ईंधन प्रौद्योगिकी है जो NO2 तथा विविक्त पदार्थ (PM) उर्त्सजन दोनों में एक साथ कमी करती है।
पानी के शमन करने के गुण के कारण थर्मल NO2 में कमी होती है और पीएम दहन प्रक्रिया में गतिज परिवर्तन द्वारा कमी आती है।
चित्र 2: उत्सर्जन में कमी करने के लिए एक प्रणाली के रूप में इमल्शन

पानी के तत्व और एपीटी के इमल्सीफाइड ईंधनों के बने रहने के कारण ही उनमें अद्वितीय दहन विशेषता उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए, जब दहन कक्ष में मूल ईंधन को छोड़ा जाता है (चाहे ये डीजल ईंधन हो, वाष्प बॉयलर या भट्ठी तेल), तो यह 20 से 100 माइक्रोन के आकार की विभिन्न बूंदों में विभाजित होता है। क्योंकि ईंधन की प्रत्येक बूंद की सतह ही वायु के प्रभाव में आने पर जलती है, अत: तरल ईंधन की बड़ी बूंदें पूरी तरह नहीं जलती, जिससे कार्बन बिना जले ही रह जाता है जो दहन कक्ष की सतह पर जमा हो जाता है या गैसों के निष्कर्षण में धूल के कण के रूप में बचा रह जाता है। यह संपूर्ण थर्मल दक्षता को कम करता है और हानिकारक उत्सर्जन को बढ़ाता है (निम्न चित्र 3 देखें)।
चित्र 3: मूल ईंधन दहन
मूल ईंधनों से भिन्न जब ईंधन की इमल्सीफाइड बूंदों को दहन कक्ष में स्प्रे किया जाता है तो अपने जल तत्वों को वाष्प में तेजी से परिवर्तित करने के परिणामस्वरूप यह दूसरी बार विभाजित हो जाता है। पानी के वाष्प में इस परिवर्तन से पानी के आसपास का पेट्रोलियम बहुत छोटी बूंदों में विभाजित हो जाता है।
चित्र 4: एम्लसिफाइड ईंधन दहन प्रक्रिया
छोटी बूंदों का अधिक व्यापक सतह क्षेत्र होता है, जलने की प्रक्रिया में पर्याप्त रूप से सुधार होता है। इमल्सीफाइड ईंधन की यह अद्वितीय दहन विशेषता को सामान्य तौर पर ''दूसरा'' विभाजन कहा जाता है। पानी का वाष्प में परिवर्तन का दूसरा प्रभाव यह होता है कि दहन प्रक्रिया से उत्पन्न अत्यधिक तापमान में कमी आती है, परिणामस्वरूप NOx उत्सर्जन काफी कम बनता है। दहन गतिज में परिवर्तन से विविक्त पदार्थ में काफी कमी आती है, जो अधूरी दहन प्रक्रिया के कारण होती है।
एपीटी सक्रिय अनुसंधान और विकास कार्यक्रम में संलग्न है ताकि वह पर्यावरण की समस्याओं का समाधान निकालने संबंधी अपनी रूपरेखा का विस्तार कर सके, लगातार बनते कड़े पर्यावरण विनियमों को साकार करने के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास कर सकें, दुनिया में जलवायु परिवर्तन तथा सीमित पेट्रोलियम संसाधनों को देखते हुए ईंधन में कार्बन की अधिकता को कम कर सके।
एपीटी अन्य पर्यावरण संबंधी प्रौद्योगिकियों की खोज कर रहा है जो एपीटी वैज्ञानिकों को रसायन यांत्रिक और दहन विज्ञान में अपनी विशेषज्ञता को बढ़ाने की क्षमता देती है। उदाहरण के लिए, अपने रासायनिक अध्ययनों में एपीटी पेट्रोरसायन उद्योग में अपनी इमल्शन प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग की तलाश कर रहा है जहां अस्थायी इमल्शनों का प्रयोग ऑक्सीकरण जैसी रासायनिक क्रिया को तेज करने के लिए किया जाता है। यांत्रिक अध्ययनों में एपीटी अन्य वैकल्पिक ईंधनों जैसे बॉयो ईंधनों में बेहतर विकास करने के लिए भौतिक सुधारों के अवसरों की तलाश कर रहा है और इंजनों एवं बॉयलरों में सुधार कर रहा है। दहन अध्ययनों में एपीटी यह खोज कर रहा है कि वह इमल्शन की अद्वितीय दहनशील विशेषताओं का नई पीढ़ी के ईंधन योजकों में इस्तेमाल कर सकता है। अंत में, एपीटी अपने अद्वितीय और प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों के दल का इस्तेमाल अन्य संभावित प्रौद्योगिकियों के मूल्यांकन के लिए कर रहा है जो लाइसेंस करार के अंतर्गत उपलब्ध हो सकती हैं।
जिन प्रौद्योगिकियों का विकास या विचार किया जा रहा है उनमें लाईट ऑयल के लिए ऑक्सीडेटिव डिसलफराइजेशन, सौर विद्युत हाईड्रोजन सृजन तथा मिथेन में परिवर्तन, अधिक देर तक चलने वाली बैटरियों का नया उत्पादन और प्रयुक्त इंजन ऑयल की रिफाइनिंग शामिल है।
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